८ नवम्बर २००९

क्लाड लेवी-स्ट्रास का अवसान



विख्यात नृवंशशास्त्री(एंथ्रोपोलाजिस्ट) क्लाड लेवी-स्ट्रास की जब 101 वर्ष की उम्र्र में मृत्यु हुई तो लोग एक बारगी चौंक गए। ऐसा इसलिए कि वे पिछले लंबे वक्त से खमोशी से चर्चाआंे और प्रचार से दूर जी रहे थे और उनकी सशरीर उपस्थिति को लोग भूल से ही गए थे। इसकी वजह यह भी है कि लंबे वक्त से लेवी स्ट्रास हमारे वक्त के सामाजिक,राजनीतिक,सांस्कृतिक चिंतन का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए थे कि उनकी सशरीर उपस्थिति का होना न होना अप्रासंगिक हो गया था। लेवी-स्ट्रास उन लोगों में से थे जिन्होंने आधुनिक समाज की चिंतन विधि को बदलने में बड़ा योगदान दिया था। उन्होंने नृवंशशास्त्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया था, लेकिन इस परिवर्तन ने आधुनिक समाज की कई बुनियादी अवधारणाओं को चुनौती दी। लेवी-स्ट्रास ने आदिम जनजातियों पर काम किया और यह स्थापना दी कि आदिवासियों की संस्कृति और चिंतन का आधार भी बहुत उन्नत,जटिल और परिष्कृत है और उसके मूल आधार वही हैं  जो आधुनिक समाज के हैं। बुनियादी संरचनाओं के इस सिद्धांत के आधार पर ही संरचनावाद  की स्थापना हुई। उनके काम ने आधुनिक समाज के 'विकास' की अवधारणा को चुनौती दी जिसके मुताबिक हम आधुनिक लोग आदिम लोगों से ज्यादा 'विकसित' हैं। उन्होंने आदिम समाजों के बारे में आधुनिक समाज के कई पूर्वाग्रहों को तोड़ा।

लेवी-स्ट्रास का काम जहाँ ठोस जमीनी शोध पर आधारित है, वहीं उसमें विवेक और कल्पना का सुंदर समन्वय है। इसकी वजह से वे जहां बौद्धिक जगत में प्रतिष्ठित हुए वहीं एक लोकप्रिय पब्लिक इंटेलेक्चुअल की तरह भी स्थापित हुए। लेवी-स्ट्रास अंतिम दिनों में फ्रांस के एक गाँव में एक एकांत काटेज में रहते थे। उनकी प्रमुख किताबें 'द सैवेज माइंड', 'माइथोलाजीज', और 'द रा एंड द कुक्ड' हैं।

- राजेन्द्र धोड़पकर
 हिन्दुस्तान दैनिक से साभार

2 टिप्पणियाँ:

शरद कोकास ने कहा…

यह सही है कि लेवी-स्त्रास की भौतिक उपस्थिति को लोग भूल गये थे । उनकी किताबें बहुत महत्वपूर्ण हैं ।
शरद कोकास , पुरातत्ववेत्ता
http://sharadkokas.blogspot.com

Pritish ने कहा…

परिचय कराने के लिये धन्यवाद!!

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